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हिमाचल: राजधानी शिमला में गूंजे जयराम ठाकुर मुर्दाबाद के नारे, मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों किसान

13 days ago | Patrika News Desk

शिमला: हिमाचल प्रदेश के राजधानी शिमला में किसानों वह बागवान अपनी मांगों को लेकर आखिर सड़कों में पर उत्तर गए हुए है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश में किसानों व बागवानों की चल रही समस्याओं का समाधान न होने के कारण आज किसानों ने मोर्चा खोल दिया हुआ है। विरोध प्रदर्शन के साथ राजधानी शिमला गूंज उठी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में सरकार किसानों व बागवानों का शोषण किया जा रहा है।

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किसानों के इस विरोध के कारण सचिवालय तक जाम लग गया हुआ है। वहीं पुलिस प्रशासन की ओर से किसानों व बागवानों को शांत किया जा रहा है। किसानों व बागवानों की और से प्रदेश सरकार के मुर्दाबाद के नारे लगाये जा रहे है। आपकों बता दें कि संयुक्त किसान मंच की ओर से पूरे प्रदेश के किसानों को पांच अगस्त को राजधानी शिमला में विरोध प्रदर्शन के बुलाया गया था।

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अभी तक एक भी बागवान को GST में छूट का लाभ नहीं
अभी तक कार्टन पर GST में छूट का फायदा भी बागवानों को नहीं मिल रहा है। सरकार ने छूट की घोषणा जरूर की है लेकिन इसे लेकर आदेश जारी नहीं किए गए। यही वजह है कि HPMC के पास आज भी उपदान पर कार्टन नहीं मिल रहा है।

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GST वापसी को लगाई जटिल शर्ते
मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि सरकार ने बेशक GST में छह फीसदी छूट दी है, लेकिन इसके लिए शर्तें बेहद जटिल लगाई है, जिससे अधिकतर बागवानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। 20 फीसदी सेब सीजन खत्म हो गया और 60 फीसदी बागवानों ने कार्टन और ट्रे खरीद ली है। ऐसे में सरकार क्या सेब सीजन के बाद जागेगी।

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छूट नहीं, कृषि इनपुट पर खत्म हो GST: चौहान
संजय चौहान ने कहा कि CM के साथ हुई बैठक में मंच ने कार्टन पर GST खत्म करने की मांग रखी थी, क्योंकि छह फीसदी छूट से मात्र तीन रुपए का फायदा हो रहा है जबकि कार्टन की कीमतें दो साल में दोगुना हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रे पर GST नहीं बढ़ने के बावजूद इसकी कीमतें 250 रुपए प्रति बंडल बड़ी है, जबकि इसी कागज से बनने वाली ट्रे अंडे की पैकिंग में भी इस्तेमाल होती है। उसके दाम नहीं बढ़े हैं। ऐसे में जानबूझकर सेब बागवानों को टारगेट किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सेब की पैदावार 27 विधानसभा क्षेत्रों में होती है। इसलिए सरकार बागवानों को हल्के में लेने की कोशिश न करें। कांग्रेस भी OPS बहाली को लेकर दावे कर रही है लेकिन सेब उत्पादकों को लेकर मौन है। जो भी राजनीतिक दल उनके मांगपत्र को लागू करेगा, बागवान उसका समर्थन करेगा।

सेब आयात पर शुल्क 100 फीसदी किया जाए
हरीश चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कई बार सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का वादा किया है लेकिन आज तक यह वादा पूरा नहीं किया गया। इससे हिमाचल समेत जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर संकट मंडरा रहा है। अफगानिस्तान के रास्ते ईरान से आ रहे सेब ने इस बार भी बागवानों को भारी नुकसान किया है। इसलिए अफगानिस्तान समेत सभी देशों पर आयात शुल्क 100 फीसदी होना चाहिए।

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