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पांगी की हर्बल औषधियां बनी पेट मित्र, खतरनाक बीमारियों के लिए रामबाण

22 days ago | Patrika News Desk

पांगी: चंबा में चल रहे ऐतिहासिक व अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में लगी प्रदर्शनी के साथ स्थापित नाबार्ड सेल्फहेल्प ग्रुप पांगी के स्टॉल में जड़ी बूटियों से तैयार की र्हबल औषधि पेट मित्र लोगों का आकर्षण बनाता जा रहा है। जड़ी बूटियों से निर्मित कुछ ऐसे उत्पाद रखे गए हैं जिनकी जानकारी लेने के लिए खरीद कर हर कोई लेना चाहता है। पांगी घाटी की पहाड़ियों में पाई जाने वाली अद्भुत जड़ी बूटियों से तैयार की गई हर्बल औषधि पेट मित्र लोगों के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक मानी जाती है। पांगी के ग्राम पंचायत कुफा के भटवास निवासी विपन चंद जो कि एक पूर्व सैनिक रह चुके हैं, वह बताते है कि उनके द्वारा निर्मित पेट मित्र हर्बल जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है

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उन्होंने बताया कि पेट मित्र औषधि का एक ढक्कन सुबह खाली पेट वह दोपहर को एक ढक्कन पीने से पेट संबंधित हर रोग के साथ-साथ गैस, पत्थरी जैसी कई खत्तरनाक बिमारियों के लिए रामबाण साबित होती है। आपकों बता दें कि पांगी की पहाड़ी में पाई जाने वाली जड़ी बूटियों कुठ, सौंसी व पिथकडू के मिश्रण से पेट मित्र औषधि का निर्माण किया गया है। विपन चंद बताते है कि जड़ी बूटियों का काम उनके पुश्तैनी दौर से करते आ रहे हैं इससे पहले उनके पिता और दादा जी इस काम को करते आए थे। उन्होंने बताया कि पेट मित्र शुगर, बीपी, हार्ट ब्लॉकेज, बाबासीर जैसे अन्य बिमारियों से बचाने का काम करता है।

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इस औषधि की प्रदर्शनी प्रदेश के विभिन्न जिलों में मेलो के दौरान लगाते है उन्होंने इससे पहले भी प्रदेश से बाहर बड़े राज्यों में पेट मित्र जड़ी बूटियों की प्रदर्शनी लगा चुके हैं। 2018 में दिल्ली में प्रदर्शनी के द्वारा उन्हें पुरस्कृत भी किया गया है। इसी तरह बनारस में लगाई गई प्रदर्शनी के दौरान उन्हें द्वितीय पुरस्कार मिला हुआ है विपन चंद एक इंडियन आर्मी में 17 पैराशूट फील्ड रेजिमेंट से 1984 में सेवानिवृत्त हो चुके है। और पिछले कई सालों से आयुर्वेदिक दवाइयां बनाकर लोगों के बीच प्रचारित कर रहे हैं ।

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क्या इन जड़ी बूटियों की खासियत

कुठ: कुठ एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसें किसानों द्वारा भी तैयार किया जाता है। इस जड़ी बूटी तीन साल बाद तैयार होती है। पांगी का किसान इस जड़ी बूटी को उस जंमीन पर तैयार करता है जहां पर बंदरों व जंगली जानवरों का आतंक होता है। यह जड़ी बूटी जमीन में गहराईयों में होने के कारण बंदर व अन्य जानवरों के आतंक से नुक्सान नहीं होता है। वहीं यह जड़ी बूटी तीन साल बाद तैयार होती है। इस बूटी के सेवन से खांसी, जुकाम व पेट दर्द से लिए लाभदायक मानी जाती है। पेट मित्र के सेवन के दौरान कड़वहाट महसूस होती है वह कुठ जड़ी बूटी के मिश्रण के कारण होती है।

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सौंसी: सौंसी पांगी घाटी के आलाव लाहूल में भी पाई जाती है। यह बूटी 12 महिनें हरी रहती है। इस जड़ी बूटी के पत्तों का इस्तेमाल से गैस, पत्थरी व बीपी के लिए लाभदायक मानी जाती है। यह जडी बूटी पांगी की पहाड़ियों में पाई जाती है। इसके मिश्रण से पेट मित्र औषधि का सेवन करने के बाद पानी पीने की इच्छा करती है।

पिथकडू: यह जड़ी बूटी पांगी के उपरली चोटियों में पाई जाती है। इस जड़ी बूटी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों की है। इस जड़ी बूटी से कई प्रकार की दवाईयों बनाई जाती है। पेट मित्र हर्बल औषधि में इसका भी मिश्रण किया गया है। इसके मिश्रण से हार्ट ब्लॉकेज, बाबासीर जैसे कई बड़ी बीमारियों के लिए लाभदायक है।

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